June 15, 2024
डूटा का विश्वविद्यालय बंद

डूटा ने वार्षिक आमसभा के बाद तदर्थ शिक्षकों के समायोजन के लिए किया मार्च

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प्रेस विज्ञप्ति:-दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) की वार्षिक आमसभा बैठक खालसा कॉलेज के सभागार में सम्पन्न हुई। वार्षिक आमसभा बैठक में डूटा सचिव एवं कोषाध्यक्ष की रिपोर्ट को बैठक में उपस्थित हज़ारों शिक्षकों ने सर्वसम्मति से पारित किया।आमसभा में दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं कॉलेजों के हज़ारों शिक्षकों ने भागीदारी की। आमसभा के बाद डूटा ने समायोजन की माँग को लेकर विश्वविद्यालय के गेट 1 तक मार्च किया गया।

मार्च संबोधन के बाद डूटा प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एवं साउथ कैम्पस निदेशक से मुलाक़ात कर अपनी माँग रखी एवं शिक्षकों के विभिन्न मुद्दों को उठाया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने शिक्षकों के सभी मुद्दों पर सकारात्मक सहयोग का आश्वासन दिया। प्रशासन ने प्रो अजय कुमार भागी के नेतृत्व में गये प्रतिनिधिमंडल को बताया कि इडब्ल्यूएस सीटों के बारे में कॉलेजों के प्राचार्य से जानकारी ली जाएगी। लम्बित प्रमोशन के मामलों का भी समाधान किया जाएगा। दिल्ली सरकार के वित्तपोषित 12 कॉलेजों के वित्तीय संकट के समाधान का प्रयास भी किया जाएगा।

गांव में स्कूल न होने का दर्द

डूटा अध्यक्ष प्रो अजय कुमार भागी ने आमसभा को संबोधित करते हुए कहा कि डूटा ने यह रिपोर्ट 29 अगस्त को हुई कार्यसमिति की बैठक में भी प्रस्तुत की थी। उन्होंने आगे कहा कि डूटा प्रत्येक वर्ष होने वाली अपनी आमसभा बैठक के माध्यम से सालभर में किए गए शिक्षक हितों के कार्यों एवं बजट का लेखा-जोखा सार्वजनिक रूप से शिक्षकों के समक्ष पेश करती है।

वार्षिक आमसभा

प्रो अजय कुमार भागी ने आमसभा रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय में कार्यरत चार हज़ार से अधिक तदर्थ एवं अस्थाई शिक्षकों के समायोजन की माँग के प्रति अपना संकल्प दोहराया। दिल्ली विश्वविद्यालय में 5 दिसम्बर, 2019 के रिकॉर्ड ऑफ़ डिस्कशन को लागू करने की माँग की। शिक्षा मंत्रालय एवं यूजीसी से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कारण 25 प्रतिशत सीटों की बढ़ोतरी के चलते इस अनुपात में शिक्षकों के पद जारी करने की भी माँग की गयी। दिल्ली विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध कॉलेजों को ईडब्ल्यूएस आरक्षण पूर्व तिथि से लागू ना करने के निर्देश देने की माँग यूजीसी से भी की गयी।

डूटा सचिव डॉ सुरेंद्र सिंह ने रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के द्वारा वित्तपोषित 12 कॉलेजों एवं 16 आंशिक वित्तपोषित कॉलेजों में वेतन की अनियमितता के संकट पर चिंता ज़ाहिर की। इन कॉलेजों के शिक्षक एवं कर्मचारियों को अपने वेतन के लिए कई महीनों तक इंतज़ार करना पड़ता है। इन कॉलेजों में शिक्षक एवं कर्मचारियों के मेडिकल बिल, शिक्षा भत्ता, एरियर का पैसा दिल्ली सरकार द्वारा समय पर जारी नही किया जाता है। दिल्ली सरकार से माँग की गयी कि शिक्षक एवं कर्मचारियों का वेतन नियमित रूप से जारी किया जाएँ एवं उसमें किसी भी तरह की कटौती ना हो।

उन्होंने दिल्ली सरकार से ईडब्ल्यूएस आरक्षण के कारण 25 प्रतिशत सीटों की बढ़ोतरी के चलते इस अनुपात में शिक्षकों के पद जारी करने की भी माँग की।

वार्षिक आमसभा में कॉलेज ऑफ़ आर्ट्स का मुद्ददा भी उठाया गया है। साथ ही दिल्ली सरकार के अधिग्रहण को अवैध मानते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय से पुन: इस कॉलेज को वापस लेने की भी माँग की गयी।

डूटा ने एनपीएस की जगह पुरानी पेंशन योजना को लागू करने की माँग भी रखी और सह-प्राध्यापक प्रमोशन के लिए पीएचडी की अनिवार्यता की तिथि को 2023 तक बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।  लाइब्रेरियन को शिक्षक समक्ष माने जाने, दिव्यांग शिक्षकों के लिए एनेब्लिंग यूनिट स्थापना एवं शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों की माँग को भी उठाया गया है।